6 महीने का सफर, 308 पहिए और 200 टन वजन... बेल्जियम से लखीमपुर पहुंची मशीन का असली काम क्या है?
Updated on
24-10-2026 02:54 PM
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक ऐसा ट्रक पहुंचा, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए. ट्रक में 308 पहिए लगे थे और उस पर करीब 200 टन वजन की एक विशाल मशीन रखी थी. मशीन बेल्जियम से भारत आई है. पहले इसे समुद्र के रास्ते ओडिशा के पोर्ट तक लाया गया, फिर वहां से सड़क के रास्ते लखीमपुर पहुंचाया गया.
इस मशीन के सफर की शुरुआत करीब छह महीने पहले हुई थी. अब इसे लखीमपुर के कुंभी में लगने वाले एक बड़े बायोप्लास्टिक प्लांट में लगाया जाएगा. आखिर इस मशीन में ऐसा क्या खास है? इसे इतनी दूर से क्यों मंगाया गया? और इसका गन्ने से प्लास्टिक बनाने से क्या कनेक्शन है? लखीमपुर खीरी में 308 पहियों वाले ट्रक पर पहुंची मशीन कोई सामान्य मशीन नहीं है. इसे बेल्जियम से भारत लाया गया है और अब कुंभी में लगने वाले बायोप्लास्टिक प्लांट में इंस्टाल किया जाना है.
इस मशीन की मदद से गन्ने से ऐसा मटेरियल बनाने की प्लानिंग है, जिससे प्लास्टिक जैसे कई प्रोडक्ट तैयार किए जा सकेंगे. यानी जिस गन्ने को हम अब तक मुख्य रूप से चीनी से जोड़कर देखते आए हैं, उसी से प्लास्टिक बनाने की कोशिश होने जा रही है. कैसे? आइए, समझते हैं.
हम सब जानते हैं कि गन्ने से चीनी बनती है. लेकिन गन्ने का इस्तेमाल सिर्फ चीनी बनाने तक सीमित नहीं है. गन्ने में मौजूद शर्करा की मदद से एक खास तरह का मटेरियल भी बनाया जा सकता है, जिसे PLA कहते हैं. इसका पूरा नाम पॉलीलैक्टिक एसिड है. PLA एक तरह का बायोप्लास्टिक है. इसका इस्तेमाल कुछ तरह की पैकेजिंग, कटलरी और कपड़े के फाइबर जैसे उत्पाद बनाने में किया जा सकता है.
200 टन की मशीन आखिर करेगी क्या?
लखीमपुर पहुंची मशीन का नाम साइक्लाइजेशन रिएक्टर है. नाम थोड़ा मुश्किल है, लेकिन इसका काम आसान तरीके से समझा जा सकता है. जैसे किसी रसोई में अलग-अलग चीजों को सही तापमान और तरीके से पकाकर एक नई चीज बनाई जाती है, वैसे ही फैक्ट्री में कुछ पदार्थों को खास परिस्थितियों में मिलाकर और रासायनिक प्रक्रिया से गुजारकर नया मटेरियल तैयार किया जाता है.
इस मशीन का वजन करीब 200 टन है. इतनी भारी मशीन को सामान्य ट्रक पर लाना संभव नहीं था. इसलिए इसे ले जाने के लिए करीब 308 पहियों वाले विशाल ट्रांसपोर्टर का इस्तेमाल किया गया. मशीन पहले बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए ओडिशा के पोर्ट तक पहुंची. इसके बाद सड़क के रास्ते इसे लखीमपुर लाया गया. इतनी भारी मशीन को सड़क पर ले जाने के लिए विशेष ट्रांसपोर्टर और जरूरी सुरक्षा इंतजामों की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि इसे लेकर चलने वाला ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया.
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