दिवाली से पहले सोने और चांदी के दाम क्यों लगातार गिर रहे हैं?
Updated on
24-10-2026 02:56 PM
वैश्विक शेयर बाज़ारों में बिकवाली और कच्चे तेल की क़ीमत 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने के बीच 23 अक्टूबर को सोने और चांदी की क़ीमतों पर दबाव बना रहा.
घरेलू बाज़ार में चांदी की क़ीमत दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे फिसल गई.
वैश्विक बाज़ार में कॉमेक्स पर सोने का वायदा भाव 4,030 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी करीब 54 डॉलर प्रति औंस पर थी.
घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का वायदा भाव 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास और चांदी का वायदा भाव 1,96,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था.
यह लगातार दूसरा सप्ताह है, जब सोने की क़ीमतों में गिरावट आई है.
ब्लूमबर्ग से टीडी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ कमोडिटी रणनीतिकार रयान मैके ने कहा, "तेल की क़ीमतों, ब्याज दरों और फ़ेड के रुख़ को लेकर चिंताओं का दबाव सोने पर पड़ रहा है. इसके अलावा, बाज़ार में निवेश भी नकारात्मक रहा है."
ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ''क़ीमती धातु की क़ीमतों में इस हफ़्ते चार फ़ीसदी की गिरावट आने की आशंका है. जून की शुरुआत के बाद यह इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट होगी. मैके के मुताबिक, सोना फ़िलहाल जोखिम से बचने के लिए निवेशकों की व्यापक बिकवाली की चपेट में है."
उनके अनुसार, "मध्य-पूर्व में नए सिरे से बढ़े तनाव ने ऊर्जा की क़ीमतों को फिर ऊपर धकेल दिया है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों से निवेश निकलने के कारण निवेशक अमेरिकी बॉन्ड की ओर रुख़ कर रहे हैं. इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ा है, जिससे सोने पर दबाव पड़ा है. आमतौर पर बॉन्ड में रिटर्न बढ़ने से सोने की क़ीमतों में कमज़ोरी आती है.''
बाज़ार के एक हिस्से में सोने की कमज़ोरी का असर दिखाई नहीं दिया है. वह है एक्सचेंज ट्रेडेड फ़ंड यानी ईटीएफ़ में सोने की होल्डिंग.
ब्लूमबर्ग जिन गोल्ड ईटीएफ़ पर नज़र रखता है, उनमें लगातार पिछले 14 सप्ताह से सोना आ रहा है. यह रुझान सोने की क़ीमतों में गिरावट के बिल्कुल उलट है.
सैक्सो बैंक ए/एस में कमोडिटी रणनीति के प्रमुख ओले हानसेन ने एक नोट में लिखा, "लंबी अवधि के निवेशक जियोपॉलिटिकल जोखिमों और करेंसी की क्रय शक्ति घटने से बचाव के लिए ईटीएफ के ज़रिए सोना जमा करना जारी रखे हुए हैं.
सोने की क़ीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है. अगस्त में 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर से सोना 23,000 रुपये सस्ता हो चुका है.
तेल की बढ़ती क़ीमतों से महंगाई की चिंताएं बनी हुई हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं तेज़ हो गई हैं.
ज़ाय कैपिटल मार्केट्स के मुख्य निवेश अधिकारी नईम असलम ने एक नोट में कहा, "हमारा मानना है कि हालिया कमजोरी के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर बढ़ता मुनाफ़ा, डॉलर की मज़बूती और ब्रेंट क्रूड की क़ीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के कारण महंगाई को लेकर फिर बढ़ती चिंताएं हैं."
बॉन्ड में उँचे रिटर्न और अमेरिकी डॉलर की मज़बूती से सोने की क़ीमतों पर भी दबाव बना हुआ है.
इससे सोने जैसी क़ीमती धातुओं को अपने पास रखने का आकर्षण कम हो जाता है, क्योंकि इनसे नियमित ब्याज आय नहीं होती.
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