ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े को लेकर पिछले तीन दिनों से दिल्ली और मुंबई में क्या-क्या हुआ?
Updated on
06-10-2026 01:57 PM
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर लगातार तीन दिन प्रदर्शन हुए. दो अक्तूबर यानी गांधी जयंती के दिन शुरू हुआ प्रदर्शन शनिवार और रविवार को भी देखने को मिला.
लेकिन दिल्ली में इस बार पुलिस ज़्यादा मुस्तैद दिखी. किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर तक पहुंचने नहीं दिया गया.
रविवार को दिल्ली में आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक 'सिटिज़न्स मार्च' निकाला. इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए काफी लोग पहुंचे.
कई और नेताओं ने भी सिटिज़न्स मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस पर बदसलूकी के आरोप लगाए.
इस प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में इंडिया गेट इलाके में पहुंचे. आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को भी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "ये हवा में मेरे जूते हैं. आज इंडिया गेट पर दिल्ली पुलिस ने मुझे उल्टा लटका दिया, ताकि कैमरों में मेरा चेहरा कैद न हो."
वीडियो में पुलिस वाले उन्हें उठाकर ले जाने की कोशिश करते हुए दिख रहे हैं.
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा, "सिटिज़न्स मार्च के दौरान आज भी निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर की ओर जाते हुए पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया. यह केवल एक दिन का प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है, जो ज्ञानेश कुमार के हटने तक जारी रहेगा."
रविवार शाम को यूथ कांग्रेस ने भी ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ मार्च निकालकर प्रदर्शन किया.
यूथ कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "जंतर-मंतर को फिर से जनता को सौंपने और ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जंतर-मंतर मार्ग पर धरने पर बैठे आईवाईसी के कार्यकर्ता."
वहीं, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने रविवार को मुंबई में 'गर्जना मोर्चा' किया. इस मार्च में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी शामिल हुए.
चोट पहुंचाने का आरोप लगाया था.
शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान दो महिला पत्रकारों और एक प्रदर्शनकारी युवती ने एक पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मियों पर यौन हमले के आरोप लगाए हैं.
एक महिला पत्रकार का आरोप है कि आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा और उन्हें धक्का देकर वहां से चले गए.
वहीं, एक वरिष्ठ महिला पत्रकार और एक प्रदर्शनकारी युवती ने दिल्ली पुलिस के कर्मियों पर यौन हमले के आरोप लगाए.
इसके बाद शनिवार और रविवार को पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन किया.
इस मार्च के दौरान आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया. नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस जिस गाड़ी में ले गई, उसमें एक भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी.
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