अदाणी विद्या मंदिर के ‘एक्शन रिसर्च प्रोजेक्ट’ से 600 ग्रामीण बच्चों को मिली कुपोषण से मुक्त
Updated on
01-07-2026 10:46 PM
एक साल में बदली 600 ग्रामीण बच्चों की सेहत, अदाणी विद्या मंदिर का पोषण मॉडल बना मिसाल
12 महीने चले विशेष ‘स्वास्थ्य एक्शन रिसर्च प्रोजेक्ट’ के सकारात्मक नतीजे, प्रार्थना सभा में बच्चों के चक्कर आने की समस्या पूरी तरह खत्म
पोषण के साथ नियमित व्यायाम प्रणाली ने बढ़ाई छात्रों की ताकत और सहनशक्ति
साल्ही, उदयपुर, अंबिकापुर (छत्तीसगढ़), 1 जुलाई 2026:
राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) की सामाजिक सरोकार शाखा अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित अदाणी विद्या मंदिर, सरगुजा ने कुपोषण से होने वाली शारीरिक कमजोरी को दूर करने और ग्रामीण विद्यार्थियों के स्वास्थ्य में सुधार लाने की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विद्यालय ने एक वर्ष तक चले विशेष स्वास्थ्य एक्शन रिसर्च प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसके माध्यम से 600 ग्रामीण विद्यार्थियों में प्रोटीन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियों के जरिए दूर किया गया। यह पहल सरगुजा जिले के 14 गांवों के विद्यार्थियों तक पहुंची और बाल स्वास्थ्य देखभाल का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है।
शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान विद्यालय के सामने एक गंभीर चुनौती थी। सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान प्रतिदिन औसतन 15 से 20 विद्यार्थियों को अत्यधिक कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत सामने आई थी। चिकित्सकीय जांच में अधिकतर विद्यार्थियों का वजन सामान्य से कम पाया गया। साथ ही उनमें सुस्ती, ऊर्जा की कमी और सहनशक्ति का अभाव देखा गया।
विद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला कि समस्या का मुख्य कारण अधिक कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन था, जिसमें आवश्यक प्रोटीन, अमीनो एसिड और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी थी। स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां भी इस चुनौती को प्रभावित कर रही थीं। सरगुजा क्षेत्र में डेयरी पशुपालन की परंपरा सीमित है और समुदाय मुख्य रूप से शाकाहारी जीवनशैली अपनाता है।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विद्यालय ने स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए पोषण और शारीरिक विकास की एक समग्र योजना तैयार की। डायटीशियनों की सलाह के आधार पर ऐसा पोषण मॉडल विकसित किया गया, जिससे परंपरागत खान-पान में बदलाव किए बिना आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सकें।
इसके साथ ही विद्यालय ने प्रार्थना सभा के बाद विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य व्यायाम प्रणाली लागू की, जिसमें सप्ताह को दो भागों में विभाजित करते हुए तीन दिन ऊपरी शरीर और तीन दिन निचले शरीर के व्यायाम कराए गए। इस अनुशासित फिटनेस व्यवस्था से विद्यार्थियों की मांसपेशियों की ताकत, सहनशक्ति और समग्र शारीरिक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
पोषण प्रोटोकॉल के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिदिन 100 मिलीलीटर दूध में चॉकलेट फ्लेवर युक्त पौष्टिक माल्ट आधारित पेय दिया गया। मध्याह्न भोजन में सोयाबीन, मूंग दाल और चना जैसे उच्च गुणवत्ता वाले पौध-आधारित प्रोटीन शामिल किए गए। इसके अलावा प्रतिदिन दो मौसमी फल और सप्ताह में दो बार सब्जियों से युक्त गेहूं का दलिया भी दिया गया। भोजन को संतुलित रखते हुए अधिक तेल, अतिरिक्त नमक और सूजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज किया गया।
लगातार 12 महीनों तक इस योजना का पालन करने के बाद विद्यार्थियों के स्वास्थ्य में स्पष्ट सुधार देखने को मिला। प्रार्थना सभा के दौरान अब किसी भी विद्यार्थी को चक्कर आने की समस्या नहीं होती। विद्यार्थियों का औसत वजन बेहतर हुआ है और उनमें पहले की तुलना में अधिक ऊर्जा, फुर्ती, आत्मविश्वास और शारीरिक सक्रियता दिखाई दे रही है।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन ने कहा,
“स्थानीय परिस्थितियों को समझते हुए संतुलित पोषण और नियमित व्यायाम को साथ लेकर चलने से यह सकारात्मक बदलाव संभव हुआ है। हमारा उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ और सक्षम बनाना था, और ये परिणाम उसी दिशा में हमारा विश्वास मजबूत करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि अदाणी विद्या मंदिर, सरगुजा में यह पहल अदाणी फाउंडेशन की क्षेत्र के समग्र विकास, स्वास्थ्य संवर्धन और आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह प्रयास दिखाता है कि स्थानीय परंपराओं के अनुरूप तैयार किए गए पोषण और फिटनेस कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों के स्वस्थ विकास का आधार बन सकते हैं।
अदाणी विद्या मंदिर, सरगुजा के बारे में
अदाणी फाउंडेशन के तत्वावधान में संचालित अदाणी विद्या मंदिर (एवीएम) आस पास के चौदह ग्रामों से अधिक के विद्यार्थियों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराता है। विद्यालय में विद्यार्थियों को निःशुल्क परिवहन, यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें और पौष्टिक भोजन भी दिया जाता है। एवीएम का उद्देश्य प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थियों को समान अवसर प्रदान करना और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए सक्षम बनाना है।
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