करवा चौथ का चांद दिख गया क्या? जानिए आपके शहर में कब होगा चंद्रोदय
Updated on
29-10-2026 08:36 PM
अखंड सौभाग्य का पावन पर्व करवा चौथ महिलाओं द्वारा अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पंचांग अनुसार यह त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। बता दें इस साल यह पर्व 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जा रहा है। यह दिन हर सुहागिन महिला के लिए विशेष महत्व रखता है। सुबह सरगी खाकर शुरू हुआ यह उपवास रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है। शाम की पूजा संपन्न होते ही सभी व्रती महिलाओं की निगाहें आसमान की ओर टिक जाती हैं और हर किसी के मन में बस एक ही सवाल होता है कि आखिर करवा चौथ का चांद कितने बजे दिखेगा?
आपके इसी सवाल का सटीक जवाब देने के लिए हम लेकर आए हैं यह खास LIVE ब्लॉग। यहां आपको दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता समेत देश के सभी प्रमुख शहरों में चंद्रोदय की सबसे तेज और सटीक टाइमिंग मिलेगी। आइए जानते हैं कि आपके शहर में 29 अक्टूबर को चांद कब दिखाई दे सकता है।
करवा चौथ का चांद दिख गया क्या 2026
पंचांग अनुसार करवा चौथ का चांद रात 8 बजकर 17 मिनट तक दिखाई देने की उम्मीद थी। लेकिन फिलहाल चांद नहीं निकला है। कई जगह बादल छाए हैं तो कहीं बारीश हो रही है। ऐसे में चांद तय समय से देरी से निकलेगा।
चंद्रमा को अर्घ्य देने और व्रत खोलने का सही नियम
चंद्रोदय से कुछ समय पहले ही अपनी पूजा थाली तैयार कर लें।
थाली में जल से भरा लोटा या करवा, रोली, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई, अपने पीने के लिए जल और छलनी अवश्य रखें।
चांद निकलने पर सबसे पहले छलनी में दीपक जलाकर उसके जरिए चंद्रमा का दर्शन करें।
फिर लोटे से चंद्रमा को जल अर्पित करें और फिर चंद्र देव की आरती उतारें।
चंद्रमा को अक्षत, फूल, रोली अर्पित करते हुए मिठाई का भोग लगाएं।
फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें और उनका आशीर्वाद लें।
अंत में पतिदेव के हाथों से जल ग्रहण करके और मिठाई खाकर अपना निर्जला उपवास पूरा करें।
इसके बाद अपने घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
अगर चांद न दिखे तो कैसे खोले करवा चौथ का व्रत?
पहला तरीका - भगवान शिव की ऐसी तस्वीर के सामने जाएं, जिनके मस्तक पर चंद्रमा दिखाई दे रहा हो। उस चित्र को देखकर चंद्र देव को प्रणाम करें और प्रार्थना करें, इसे चंद्र दर्शन के समान ही फलदायी माना जाता है।
दूसरा तरीका - यदि देश के किसी अन्य शहर में चांद निकल चुका है, तो उसी दिशा की ओर मुख करके चंद्र देव को प्रणाम करें और विधि विधान अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल लें।
तीसरा तरीका - चांदी को चंद्रमा की धातु माना गया है। इसलिए चांदी के सिक्के या किसी गोल वस्तु को चंद्रमा का प्रतीक मानकर अर्घ्य दें और अपना व्रत पूरा करें।
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