हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की मदद के लिए क्या अब जंग में उतरेगा तुर्की
Updated on
18-10-2026 12:51 PM
सऊदी अरब पर हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच तुर्की इस बात पर विचार कर रहा है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत वह सऊदी अरब की मदद के लिए क्या-क्या कर सकता है.
तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ हुए समझौते के तहत दी जाने वाली संभावित सैन्य मदद के विकल्प ज़मीनी ज़रूरतों के मुताबिक़ तय किए जाएंगे.
हालांकि, इससे पहले तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली की मंज़ूरी लेनी होगी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इस सिलसिले में तुर्की की पहली प्राथमिकता मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को संसद से मंज़ूरी दिलाना है.
इसके बाद विदेश में सेना भेजने की अनुमति से जुड़ा प्रस्ताव दोबारा संसद के सामने मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा. दूसरी ओर, तुर्की की योजना सऊदी अरब की ज़रूरतों और मांगों के मुताबिक़ मदद का दायरा तय करने की है. फ़िलहाल सबसे अहम विकल्प सऊदी अरब की रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए हवाई सुरक्षा और दूसरी सैन्य रसद क्षमताओं को सक्रिय करना है.
सऊदी अरब को सैन्य मदद
हूतियों और सऊदी अरब के बीच झड़पें ख़ास तौर पर पिछले दो हफ़्तों के दौरान बढ़ी हैं.
इन झड़पों में सऊदी अरब के ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे और हवाई अड्डों के साथ कुछ पवित्र जगहों को भी निशाना बनाया गया है.
ईरान समर्थित हूतियों के हमलों पर तुर्की और पाकिस्तान समेत कई देशों ने प्रतिक्रिया दी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सात अक्तूबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया.
उनसे तुर्की और पाकिस्तान की ओर से "सऊदी अरब को सैन्य मदद देने" के फ़ैसले के बारे में पूछा गया.
इस पर ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि वे सऊदी अरब की मदद करना चाहते हैं और यह अच्छी बात है."
तुर्की ने ख़ास तौर पर मक्का गठबंधन के तहत सऊदी अरब को सैन्य मदद देने के मुद्दे को अपने एजेंडे में शामिल कर लिया है.
राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने अपने बयानों से साफ़ किया है कि इस तरह की मदद देने को लेकर अंकारा में मज़बूत राजनीतिक इच्छा है.
अर्दोआन ने 13 अक्तूबर को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फ़ोन पर बात की थी.
इस दौरान उन्होंने कहा था कि तुर्की, सऊदी अरब के साथ खड़ा रहेगा.
सऊदी अरब को संभावित मदद देने से जुड़ी प्रक्रिया तुर्की के विदेश और रक्षा मंत्रालय मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं.
तुर्की के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में इस बात के संकेत दिए कि सऊदी अरब की मदद करने के लिए क़ानूनी और सैन्य स्तर पर किस रास्ते को अपनाया जाएगा.
मंत्रालय के बयान से पता चलता है कि सऊदी अरब को तुर्की की ओर से संभावित सैन्य मदद और क्षमताएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक़ आगे बढ़ेगी.
इसके लिए पहले तुर्की की संसद से मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है.
इसके बाद तुर्की के सशस्त्र बलों को विदेश में तैनात करने से जुड़े प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दिलानी होगी.
तुर्की के संविधान के अनुच्छेद 92 में कहा गया है कि तुर्की की सेना को विदेश भेजने या विदेशी सेनाओं को तुर्की में तैनात करने का अधिकार देश की संसद के पास है.
राष्ट्रपति अर्दोआन ने भी 12 अक्तूबर को कहा था कि यह समझौता आने वाले दिनों में संसद के सामने पेश किया जाएगा.
समझौते और प्रस्ताव को संसद से मंज़ूर कराने के लिए साधारण बहुमत काफ़ी है.
क़ानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सैन्य मदद का स्वरूप कैसे तय होगा, इसे लेकर राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा, "संभावित सहयोग का दायरा तय करते समय सऊदी अरब की ज़रूरतों और मांगों, ज़मीनी हालात और सैन्य अभियानों की ज़रूरतों को ध्यान में रखा जाएगा."
"इस बारे में हमारे संबंधित संस्थानों के आकलन और दोनों पक्षों के बीच बनने वाली सहमति के मुताबिक़ नियम तय किए जाएंगे."
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